Tuesday, February 24, 2015

विश्व कप में क्रिस गेल के रिकॉर्ड


क्रिस गेल ने जिंबॉब्वे के खिलाफ विश्व कप 2015 के ग्रुप मैच में 215 (147 गेंदें) रनों की धुआंधार पारी के दम पर न सिर्फ अपनी टीम का विजयी सिलसिला बरकरार रखने में मदद की बल्कि कई बड़े रिकॉर्ड भी दर्ज किए। आइए एक नजर डालते हैं कि आज उनकी इस स्वर्णिम पारी ने कैसे बनाए तमाम रिकॉर्डः

क्रिस गेल की 215 रनों की ये पारी विश्व कप इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी साबित हुई। इससे पहले ये रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन के नाम था जिन्होंने यूएई के खिलाफ 1996 विश्व कप में 188 रनों की पारी खेलकर रिकॉर्ड बनाया था।

गेल का ये दोहरा शतक वनडे क्रिकेट का पांचवां दोहरा शतक तो साबित हुआ ही, साथ ही वो ऐसा करने वाले पहले गैर भारतीय खिलाड़ी भी बन गए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भारत के रोहित शर्मा (2 दोहरे शतक), सचिन तेंदुलकर (1) और वीरेंद्र सहवाग (1) के नाम पर ही ये सफलता दर्ज थी।

इससे पहले वनडे क्रिकेट में बने चारों दोहरे शतक भारतीय जमीन पर ही बने थे। गेल पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने भारत से बाहर इस सफलता को अंजाम दिया है। सचिन, सहवाग और रोहित शर्मा ने ये कामयाबी भारतीय पिच पर ही हासिल की थी।

गेल का दोहरा शतक वनडे क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक भी साबित हुआ। उन्होंने 138 गेंदों पर डबल धमाल मचाकर ये रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले ये रिकॉर्ड वीरेंद्र सहवाग के नाम था जिन्होंने अपनी 219 रनों की पारी के दौरान 140 गेंदों में 200 का आंकड़ा छुआ था।

एक वनडे पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के रिकॉर्ड में भी अब क्रिस गेल संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर आ गए हैं। गेल ने अपनी 215 रनों की पारी में 16 छक्के जड़े। अब वो इस मामले में संयुक्त तौर पर दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स और भारत के रोहित शर्मा के साथ शीर्ष पर मौजूद हैं।

गेल ने आज के मैच में अपनी 215 रनों की शानदार पारी के बाद वनडे क्रिकेट में अपने रनों के आंकड़े को 9136 तक पहुंचा दिया, जिसके साथ ही वो वेस्टइंडीज वनडे इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनके अलावा सिर्फ पूर्व महान कैरेबियाई बल्लेबाज ब्रायन लारा ही 9000 का आंकड़ा पार सके हैं। विश्व क्रिकेट में ऐसा करने वाले गेल 16वें बल्लेबाज बन गए हैं।

क्रिस गेल ने अपना 22 वनडे शतक जड़ा जो कि वेस्टइंडीज क्रिकेट में किसी भी खिलाड़ी द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा वनडे शतक हैं। विश्व क्रिकेट में अब सबसे ज्यादा शतक बनाने वालों की सूची में संयुक्त तौर पर दूसरे स्थान पर कब्जा जमा लिया है। उनके साथ विराट कोहली और सौरव गांगुली भी 22-22 शतक जड़कर दूसरे नंबर पर मौजूद हैं। सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड अब भी सचिन तेंदुलकर (49 शतक) के ही नाम है।

जिंबॉब्वे के खिलाफ इस मैच में गेल और मार्लन सैमुअल्स के बीच दूसरे विकेट के लिए हुई 372 रनों की साझेदारी वनडे क्रिकेट इतिहास में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी भी साबित हुई। इससे पहले ये रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के नाम था जिन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 1999 में 331 रनों की साझेदारी को अंजाम दिया था। गेल-सैमुअल्स की ये साझेदारी लिस्ट-ए क्रिकेट को मिलाकर भी अब तक सबसे बड़ी साझेदारी है (किसी भी विकेट के लिए)।

लहसुन के बड़े फायदे



लहसुन सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के लिए एक औषधी की तरह भी काम करता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए,बी व सी भी पाए जाते हैं। लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। भोजन में किसी भी तरह इसका सेवन करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है

  • 100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने और आठ-दस लहसुन की कुली डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं। जब लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें और बोतल में भर दें। इस तेल को गुनगुना कर इसकी मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है।
  • लहसुन की एक कली छीलकर सुबह एक गिलास पानी से निगल लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है।साथ ही ब्लडप्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।
  • लहसुन डायबिटीज के रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। यह शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में कारगर साबित होता है।
  • खांसी और टीबी में लहसुन बेहद फायदेमंद है। लहसुन के रस की कुछ बूंदे रुई पर डालकर सूंघने से सर्दी ठीक हो जाती है।
  • लहसुन दमा के इलाज में कारगर साबित होता है। 30 मिली लीटर दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है।
  • लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसमें और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे सिर्फ मुहांसों पर लगाएं। मुहांसे साफ हो जाएंगे।
  • लहसुन की दो कलियां पीसकर एक गिलास दूध में उबाल लें और ठंडा करके सुबह शाम कुछ दिन पीएं दिल से संबंधित बीमारियों में आराम मिलता है।
  • लहसुन के नियमित सेवन से पेट और भोजन की नली का कैंसर और स्तन कैंसर की सम्भावना कम हो जाती है।
  • नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर नियमित रहता है। एसीडिटी और गैस्टिक ट्रबल में भी इसका प्रयोग फायदेमंद होता है। दिल की बीमारियों के साथ यह तनाव को भी नियंत्रित करती है।
  • लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे।
  • यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। इसको पीसकर त्वचा पर लेप करने से विषैले कीड़ों के काटने या डंक मारने से होने वाली जलन कम हो जाती है।
  • जुकाम और सर्दी में तो यह रामबाण की तरह काम करता है। पाँच साल तक के बच्चों में होने वाले प्रॉयमरी कॉम्प्लेक्स में यह बहुत फायदा करता है। लहसुन को दूध में उबालकर पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लहसुन की कलियों को आग में भून कर खिलाने से बच्चों की साँस चलने की तकलीफ पर काफी काबू पाया जा सकता है।
  • लहसुन गठिया और अन्य जोड़ों के रोग में भी लहसुन का सेवन बहुत ही लाभदायक है।

लहसुन की बदबू

अगर आपको लहसुन की गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। रोजमर्रा के लिये आप लहसुन को छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी। लहसुन खाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी।

Sunday, February 15, 2015

भारत में उघोगों की स्थापना


1. भारत में पहली कोयले की खान - रानीगंज (1820)
2. भारत की पहली ट्रेन - मुम्बई से ठाणे (1853)
3. भारत का पहला राकेट - रोहणी (1967)
4. भारत का पहला उपग्रह - आर्यभट् (1975)
5. भारत की पहली इस्पात फैक्टी - टाडा जमशेदपुर (1907)
6. भारत का पहला कृषि विश्व विद्यालय - पंतनगर विश्व विद्यालय (1960)
7. भारत का पहला नेशनल पार्क - जिम कार्बेट (1935)
8. भारत की पहली हवाई उड़ान - इलाहाबाद से नैनी (1911)
9. भारत का पहला जूट कारखाना - रिसरा (कलकत्ता में 1855)
10. भारत की पहली सीमेण्ट फैक्ट्री - चेन्नई (1904)
11. भारत की पहली रबड़ की फैक्टी - बरेंली (1955)

"माँ"



माँ- दुःख में सुख का एहसास है,
माँ - हरपल मेरे आस पास है ।
माँ- घर की आत्मा है,
माँ- साक्षात् परमात्मा है ।
माँ- आरती, अज़ान है,
माँ- गीता और कुरआन है ।
माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,
माँ- उस रब का ही एक रूप है
माँ- तपती धूप में साया है,
माँ- आदि शक्ति महामाया है ।
माँ- जीवन में प्रकाश है,
माँ- निराशा में आस है ।
माँ- महीनों में सावन है,
माँ- गंगा सी पावन है ।
माँ- वृक्षों में पीपल है,
माँ- फलों में श्रीफल है ।
माँ- देवियों में गायत्री है,
माँ- मनुज देह में सावित्री है ।
माँ- ईश् वंदना का गायन है,
माँ- चलती फिरती रामायन है ।
माँ- रत्नों की माला है,
माँ- अँधेरे में उजाला है,
माँ- बंदन और रोली है,
माँ- रक्षासूत्र की मौली है ।
माँ- ममता का प्याला है,
माँ- शीत में दुशाला है ।
माँ- गुड सी मीठी बोली है,
माँ- ईद, दिवाली, होली है ।
माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,
माँ- की याद हमें अति की आई है ।
माँ- मैरी, फातिमा और दुर्गा माई है,
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।

Sunday, December 28, 2014

शंखनाद की औषधीय विशेषता

  • हिंदू मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह रत्नों में से एक शंख की उत्पत्ति छठे स्थान पर हुई। शंख में भी वही अद्भुत गुण मौजूद हैं, जो अन्य तेरह रत्नों में हैं। दक्षिणावर्ती शंख के अद्भुत गुणों के कारण ही भगवान विष्णु ने उसे अपने हस्तकमल में धारण किया हुआ है।
  • शंख मुख्यतः दो प्रकार के होते ह्रैं : वामावर्ती और दक्षिणावर्ती। इन दोनों की पूजा का विशेष महत्व है। दैनिक पूजा-पाठ एवं कर्मकांड अनुष्ठानों के आरंभ में तथा अंत में वामावर्ती शंख का नाद किया जाता है। इसका मुख ऊपर से खुला होता है। इसका नाद प्रभु के आवाहन के लिए किया जाता है। इसकी ध्वनि से क्क शब्द निकलता है। यह ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। वैज्ञानिक भी इस बात पर एकमत हैं कि शंख की ध्वनि से होने वाले वायु-वेग से वायुमंडल में फैले वे अति सूक्ष्म किटाणु नष्ट हो जाते हैं, जो मानव जीवन के लिए घातक होते हैं।
  • उक्त अवसरों के अतिरिक्त अन्य मांगलिक उत्सवों के अवसर पर भी शंख वादन किया जाता है। महाभारत के युद्ध के अवसर पर भगवान कृष्ण ने पांचजन्य निनाद किया था। कोई भी शुभ कार्य करते समय शंख ध्वनि से शुभता का अत्यधिक संचार होता है। शंख की आवाज को सुन कर लोगों को ईश्वर का स्मरण हो आता है।
  • शंख वादन के अन्य लाभ भी हैं। इसे बजाने से सांस की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से शंख बजाना विशेष लाभदायक है। शंख बजाने से पूरक, कुंभक और प्राणायाम एक ही साथ हो जाते हैं। पूरक सांस लेने, कुंभक सांस रोकने और रेचक सांस छोड़ने की प्रक्रिया है। आज की सबसे घातक बीमारी हृदयाघात, उच्च रक्त चाप, सांस से संबंधित रोग, मंदाग्नि आदि शंख बजाने से ठीक हो जाते हैं।
  • घर में शंख वादन से घर के बाहर की आसुरी शक्तियां भीतर नहीं आ सकतीं। यही नहीं, घर में शंख रखने और बजाने से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं।
  • दक्षिणावर्ती शंख सुख-समृद्धि का प्रतीक है। इसका मुख ऊपर से बंद होता है।
  • अगर आपको खांसी, दमा, पीलिया, ब्लड प्रेशर या दिल से संबंधित मामूली से लेकर गंभीर बीमारी है तो इससे निजात पाने का एक सरल और आसान सा उपाय है- प्रतिदिन शंख बजाइए।
  • करते हैं कि शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है।
  • शंखनाद से सकारात्मक ऊर्जा का सर्जन होता है जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है।
  • शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है।
  • प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं हो सकते।
  • शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है।
  • शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का भी व्यायाम हो जाता है।
  • शंख वादन से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।

Saturday, December 27, 2014

श्रीमद्भागवत कथा भाग 112


भागवत में आनंद ही आनंद है क्योंकि श्रीकृष्ण पूर्ण आनंद स्वरूप हैं। संतों ने दो प्रकार के आनंद बताए- 1. साधन जन्य आनंद जो साधन से प्राप्त हो वह साधन जन्य आनंद कहलाता है। जैसे किसी को रसमलाई खाने में आनंद आता है तो किसी को नहीं। ठीक इसी प्रकार संसार की सभी वस्तुओं में अलग-अलग व्यक्ति के लिए समय-समय पर कम अधिक आनंद प्राप्त होता रहता है। किसी को बड़े जोर की भूख लगी हो, उसे रसगुल्ले खाने को दिए जायें तो पहले रसगुल्ले की अपेक्षा उत्तरोत्तर आनंद का ह्रास होता चला जाता है और एक समय पूर्णता की स्थिति को प्राप्त हो व्यक्ति रसगुल्लों से मोह त्याग देता है। कहने का भाव यह है कि हर वस्तु में हर समय हर मानव को एक जैसा आनंद प्राप्त नहीं होता और प्राप्त होने वाले आनंद में स्थायित्व भी नहीं होता है। 2. स्वयं सिद्ध आनंद यह आनंद बड़ा ही विलक्षण आनंद है। इस आनंद में वस्तु का अभाव होता है तो भी आनंद प्राप्त होता है, विपरीत परिस्थितियों में भी आनंद प्राप्त होता है। श्री शुकदेव बाबा के पास कुछ भी नहीं था फिर भी आनंद में निमग्न रहते थे। एक संत विपरीत स्थिति में कांटों की सेज पर भी आनंद का अनुभव करता है तथा साधनों के अभाव में भी निरंतर आनंद प्राप्त करता रहता है। परंतु परिपूर्ण आनंद तो श्रीकृष्ण दर्शन से ही मिलती है।

अक्षय पात्र की घटना 2

भगवान ने द्रौपदी की पुकार सुनते ही उस अक्षय पात्र में लगे हुए साग के एक तिनके को खा लिया, जिससे दुर्वासा ऋषि सहित सारी सृष्टि ही तृप्त हो गयी| भूख तृप्त होने पर दुर्वासा ऋषि ने पाण्डवों को “युद्ध में विजयी होने” का आशीर्वाद दे दिया| अर्जुन कह्ते हैं कि भगवान की कृपा से ही हम सब पाण्डव दुर्वासा ऋषि के शाप से बच पाये| दुर्वासा जी की सेवा की दुर्योधन ने और आशीर्वाद मिला पाण्डवों को, यह सब भगवान की ही कृपा थी| आज रथ, धनुष-बाण और अर्जुन भी वही है ,परंतु किसी में भी शक्ति नहीं है| पाण्डव-कुल में बहुत सी विशेषताएं हैं:- जैसे कि इस कुल में सभी भगवान के महान भक्त थे और नारियां तो महान थीं हीं|

भगवान के स्वधाम-गमन की बात सुनते ही कुंती ने अपने प्राण त्याग दिये थे| भगवान के स्वधाम-गमन और कुन्ती के देहावसान के बाद पाण्डवों ने परीक्षित जी को राजगद्दी पर बिठाया और स्वयं स्वर्गारोहण के लिये बद्रीनाथ जी की तरफ प्रस्थान किया| अब श्रीपरीक्षित जी हस्तिनापुर के सम्राट हुए| उन्होंने इरावती से विवाह किया| उनके जनमेजय आदि चार पुत्र हुए| उन्होंने अनेक यज्ञ कराये| वे प्रजा को प्राणों के समान प्रिय मानते थे|

Thursday, December 18, 2014

कुछ सूत्र जो याद रक्खे


  • चाय के साथ कोई भी नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए। दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है।
  • सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी।
  • दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए।
  • दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए।
  • गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए।
  • ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं।
  • शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं।
  • खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं।
  • घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा।
  • तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं।
  • चावल के साथ सिरका कभी नहीं।
  • चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं।
  • खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं।
कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-
  • खरबूजे के साथ चीनी
  • इमली के साथ गुड
  • गाजर और मेथी का साग
  • बथुआ और दही का रायता
  • मकई के साथ मट्ठा
  • अमरुद के साथ सौंफ
  • तरबूज के साथ गुड
  • मूली और मूली के पत्ते
  • अनाज या दाल के साथ दूध या दही
  • आम के साथ गाय का दूध
  • चावल के साथ दही
  • खजूर के साथ दूध
  • चावल के साथ नारियल की गिरी
  • केले के साथ इलायची
कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं।

ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ ---
  • केले की अधिकता में दो छोटी इलायची
  • आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड
  • जामुन ज्यादा खा लिया तो ३-४ चुटकी नमक
  • सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम
  • खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत
  • तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग
  • अमरूद के लिए सौंफ
  • नींबू के लिए नमक
  • बेर के लिए सिरका
  • गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो ३-४ बेर खा लीजिये
  • चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये
  • बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च
  • मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये
  • बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं
  • खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये
  • मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं
  • इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये
  • मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये
  • मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये
  • घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं
  • खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें
  • पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये
अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये , ८०% बीमारियों से बचे रहेंगे।

अब ये देखिये कि किस महीने में क्या नही खाना चाहिए और क्या जरूर खाना चाहिए ---
  • चैत में गुड बिलकुल नहीं खाना, नीम की पत्ती /फल, फूल खूब चबाना।
  • बैसाख में नया तेल नहीं खाना,चावल खूब खाएं।
  • जेठ में दोपहर में चलना मना है, दोपहर में सोना जरुरी है।
  • आषाढ़ में पका बेल खाना मना है, घर की मरम्मत जरूरी है।
  • सावन में साग खाना मना है, हर्रे खाना जरूरी है।
  • भादो मे दही मत खाना, चना खाना जरुरी है।
  • कुवार में करेला मना है, गुड खाना जरुरी है।
  • कार्तिक में जमीन पर सोना मना है, मूली खाना जरूरी है।
  • अगहन में जीरा नहीं खाना , तेल खाना जरुरी है।
  • पूस में धनिया नहीं खाना, दूध पीना जरूरी है।
  • माघ में मिश्री मत खाना, खिचड़ी खाना जरुरी है।
  • फागुन में चना मत खाना, प्रातः स्नान और नाश्ता जरुरी है।
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